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Saturday, 10 May 2014

"माँ शब्द अपने आप में ही पूरा है "..... (Mother's Day)


तेरी दुओं के कारण ज़िंदा हूँ माँ ,

तेरे आँचल कि छाओं में आबाद हूँ माँ। 

तेरे प्यार कि बारिश में भिगोते रहना ,

तेरी बढ़ती उम्र का सहारा हूँ माँ। 

तुझे प्यार करता हूँ अपने से भी कई ज्यादा ,

तेरे हौसलों कि उम्मीद हूँ माँ।

Thursday, 1 May 2014

जाग जाने कि जरुरत है अब हमें.......

क्यों दुनिया एक मायाजाल मैं फँसी हुई है ,

क्यों कुछ बटनों कि कटपुतली बनी हुई  है। 

बाहर निकल कर देखने कि जरुरत है अब हमें ,

खुले आसमां में उड़ने कि जरुरत है अब हमें। 

हुई धुंधली ज़िन्दगी में रौशनी लाने कि जरुरत है अब हमें। 

बस गुज़ारिश है तुमसे मेरे यारोँ ,

देर हो जाने  से पहले जाग जाने कि जरुरत है अब हमें।